शनिवार, 17 दिसंबर 2011

अरविन्द केजरीवाल-"इंडियन ऑफ़ द इयर" 2011

कल एक न्यूज़ चैनल पर "इंडियन ऑफ़ द इयर" अवार्ड समारोह में टीम अन्ना को "Public Service Category" के लिए सम्मान मिला. टीम अन्ना के सदस्य अरविन्द केजरीवाल भी अन्ना के साथ मंच पर आये. सम्मान अन्ना ने लिया. पर राजदीप सरदेसाई ने सबसे पहले अरविन्द केजरीवाल (जिन्हें उन्होंने अन्ना का हनुमान कहा) को बोलने का अवसर दिया. अरविन्द केजरीवाल ने अपना संक्षिप्त धन्यवाद भाषद हिंदी में बोला और कहा कि ये सम्मान देश का सम्मान है और टीम अन्ना सिर्फ उसे ग्रहण कर रही है. प्रभावित करने वाली उनकी सादगी थी और राजदीप ने स्वयं कहा कि अरविन्द जब पिछली बार ये सम्मान सूचना के अधिकार के लिए लेने आये थे तो भी उनकी वेश भूषा यही थी. कुछ नहीं बदला. गौरतलब है कि अरविन्द केजरीवाल और नितीश कुमार ही ऐसे दो व्यक्ति है जिन्हें चैनल द्वारा "इंडियन ऑफ़ द इयर" में सम्मान दो बार मिला.


अभी बात केजरीवालजी की. उन्होंने जिस तरह स्वयं को समाज कि सेवा के लिए झोंक दिया है वो इस भौतिक वादी युग में संभव नहीं है और इसका अतिरेक उदाहरण मिल पाना मुश्किल है. वह व्यक्ति जो अपने जीवन में कितना भी पैसा कमा सकता था सब छोड़कर कैसे देश कि व्यवस्था को पुनः परिभाषित कर रहा है.ये बात सत्य है कि कानून देश और उसके नागरिकों के लिए होता है पर बकौल केजरीवाल जब नागरिकों से पूंछा ही न जाए और ऐसा कानून जो नागरिकों को ही परेशानी पैदा करे किस काम का. सही अर्थों में भारत देश सिर्फ लिखित कानूनों का ही देश है और जब उसके सही क्रियान्वयन का समय आता है तो कुछ भी नहीं होता. ये बात तो शायद कानून मंत्री को भी पता ना होगी कि भारत में इस समय कितने कानून प्रभावी हैं. केजरीवाल ने जो ससक्त लोकपाल कि बात कही है जब उसका संसद में पेश होना इतना मुश्किल हो रहा है तो पास होना और क्रियान्वयन कितना चुनौतीपूर्ण होगा ये तो समय बताएगा. पर अन्ना के माध्यम से जो भी हो रहा वो गलत नहीं हो रहा. कम से कम ऐसे समय जब इस देश में भ्रस्टाचार अपने चरम पर है. जो लोग अन्ना के इस आन्दोलन के विरोध में है उन्हें कम से कम एक बार अन्ना और केजरीवाल कि दिनचर्या देख लेना जरुरी है. केजरीवाल अपनी युवावस्था में जब इतना साधारण सार्वजानिक जीवन जी रहे है तो देश के युवाओं को उनसे प्रेरणा लेना चाहिए.सही अर्थों में इंडियन ऑफ़ द इयर तो अरविन्द केजरीवालजी ही है जिनके त्याग और जुझारू स्वभाव कारण ही आन्दोलन, जन आन्दोलन बन चुका है.

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