शनिवार, 15 अक्टूबर 2011

अस्थिर सरकार, विपक्ष और अर्थव्यवस्था


सरकार में बैठे हुए जनता के नुमायेंदे सिर्फ एक ही काम में व्यस्त है और वो है किसी भी तरह सरकार को स्थिर रखना कम से कम गिरने तो नहीं देना. साथ ही ऐसा कुछ करने का प्रयत्न करना जिससे गाँधी परिवार के पक्ष में माहौल बने. प्रधानमंत्री आज भी चुप है शायद वो गाँधी नेहरु परिवार के अतिरेक ऐसे पहले व्यक्ति बनना चाहते है जिसने लाल किले पे दस बार तिरंगा लहराया है. सब जगह होड़ लगी है रिकॉर्ड बनाने की. विपक्ष के सभी लोग प्रधानमंत्री की कुर्सी पर काबिज होने की होड़ में है गोयाकि सभी उम्मीद्वार हैं पर कुर्सी खाली तो हो. यहाँ पर अच्छी बात ये है कि विपक्ष सरकार के लिए कोई आफत कड़ी नहीं कर रहा. आपस में हे रस्साकसी चल रही है. अर्थशास्त्री प्रधानमंत्रीजी ने आजकल मंहगाई जाने क़ी अंतिम तिथि भी बताना बंद कर दी है. शायद उसकी expiry डेट निकल चुकी है अर्थात उनकी बीस साल पहले जमी हुई अर्थनीति विफल होती दिख रही है. देश में
चारों तरफ नैराश्यमय वातावरण बनता जा रहा है.

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