पता नहीं अजीब सा लग रहा है..समझ में नहीं आ रहा क्या करू क्या कहूं...शेयर बाज़ार ने छलांग मार दी है..मेरे कई मित्र जो वित्तीय बाज़ार में समझ रखते हैं कल हैरान थे कि आखिर डीजल और घरेलु गैस की कीमतों में वृद्धि के बाद भी शेयर बाज़ार में इतनी हलचल क्यों है..कोई बोला रिज़र्व र्बैंक रेट कट करेगा..पर ये क्या सरकार ने तो अपनी पुरानी फाइलों की धूल हटाकर उन पर ही काम किया है..अब शायद सोमवार को रेट भी कट जाएँ तो सम्भावना है..ये क्या है? शायद सरकार बचाने और चुनाव की तयारी के लिए विदेशी हाथ का सहारा..जनता की स्मृति कमजोर है..सबकी जेब में पैसा भर दो चारों तरफ सिर्फ पैसा ही पैसा दिखा दो और चुनाव जीत लो..फिर वैसे ही हो जाओ..घोटाले पर से पर्दा हटाओ..पर्दा गिराओ और पर्दा चदाओ..लग रहा है सब गलत हो रहा है..कांग्रेस का हाथ गरीबो के साथ कि जगह कांग्रेस का हाथ गरीबो विदेशियों के साथ दिखता नज़र आ रहा है..दिशाहीन देश को विदेशी पूंजी दिशा दिखाएगी..सत्ता में बैठे लोग कहेंगे विपक्ष काम नहीं करने देता..विपक्ष कहेगा सरकार मनमानी है, मनमौजी है गरीब विरोधी है..एक साथ दो बड़े काम करके सरकार ने विपक्ष की ही दिशा बदल दी और विरोधहीन कर दिया...विरोध कहाँ करे..घोटालों का, कीमतों में वृद्धि का या विदेशी निवेश का...कुछ समझ नहीं पड़ता..विपक्ष जब सत्ता में आयेगा तो वो भी वही करेगा जो सरकार कर रही है...
सरकार सत्ता की फिल्म की रीलें बढ़ी तेज़ी से चला रही है खराब सीन की जगह आँखों को अच्छे लगने वाले रंगीन सीन दिखाए जा रहे है..ताकि जनता कि ऑंखें चौंधिया जाएँ और बंद ही रहें..वो रंगीनियों में खो जाए और ख़राब श्याम रंग के सीनों को भूल जाए..देखते है ये रंगीन सीन कब तक चलते हैं..
(ये कार्टून आज के "हिन्दू" में आया है)

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