कल रात घर में टेलीविजन सेट पर फिल्म "छोटी सी बात" (१९७५)
देखने का मौका मिला. पहले भी ये फिल्म कई बार टुकड़ों टुकड़ों में देखी थी. पसंद तो पहले
भी आई थी पर इस बार दिल को छू गयी. इस फिल्म का डीवीडी जरुर ही खरीदूंगा अपने संकलन
के लिए. ये फिल्म कॉमेडी के साथ साथ बहुत कुछ थी. संगीत बहुत ही मोहक है. फिल्म के
तीनों गाने अच्छे हैं पर योगेश का लिखा, सलिल चौधरी द्वारा
संगीतबद्ध एवं मुकेश के स्वर से निकला ये गीत बहुत पसंद आया:-
यह दिन क्या आए लगे फूल
हंसने
देखो बसंती बसंती, होने
लगे मेरे सपने
सोने जैसी हो रही हैं हर सुबह मेरी
लगे हर सांझ अब गुलाल से भारी
चलने लगी महकी हुई पवन मगन झूम के
आँचल तेरा झूम के
वहाँ मन बावरा, आज उड़ चला
जहाँ पर हैं गगन सलोना सावला
जाके वही रख दे कहीं मान रंगों में खोल के
सपने ये अनमोल से
यह दिन क्या आए लगे फूल हसने
देखो बसंती बसंती, होने लगे मेरे सपने
यह दिन क्या आए लगे फूल हंसने
सोने जैसी हो रही हैं हर सुबह मेरी
लगे हर सांझ अब गुलाल से भारी
चलने लगी महकी हुई पवन मगन झूम के
आँचल तेरा झूम के
वहाँ मन बावरा, आज उड़ चला
जहाँ पर हैं गगन सलोना सावला
जाके वही रख दे कहीं मान रंगों में खोल के
सपने ये अनमोल से
यह दिन क्या आए लगे फूल हसने
देखो बसंती बसंती, होने लगे मेरे सपने
यह दिन क्या आए लगे फूल हंसने
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